کی
व्यक्ति यदि धार्मिक है तो उसे अपना धन याचकों में वितरित कर देना चाहिए, यदि वह नास्तिक है तो उसे धन का भोग-विलास में उपयोग करना चाहिए, यदि मनुष्य धन को स्पर्श भी न करके छिपा कर रखता है तो उसमें उसका क्या हेतु है, यह हमारी समझ में नहीं आता।