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लवली गोस्वामी

1987 | धनबाद, झारखंड

सुपरिचित-सम्मानित कवि-लेखक। दो कविता-संग्रह ‘उदासी मेरी मातृभाषा है’ और ‘पंखुड़ी की ढाल’ तथा एक उपन्यास ‘वनिका’ प्रकाशित। दर्शन और मिथकशास्त्र में भी दख़ल। इस विषय पर एक पुस्तक 'प्राचीन भारत में मातृसत्ता और यौनिकता' चर्चित।

सुपरिचित-सम्मानित कवि-लेखक। दो कविता-संग्रह ‘उदासी मेरी मातृभाषा है’ और ‘पंखुड़ी की ढाल’ तथा एक उपन्यास ‘वनिका’ प्रकाशित। दर्शन और मिथकशास्त्र में भी दख़ल। इस विषय पर एक पुस्तक 'प्राचीन भारत में मातृसत्ता और यौनिकता' चर्चित।

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