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Lalitmohini dev

1723 - 1801 | مدھیہ پردیش

تمام تمام

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निंदा करै सो धोबी कहिए, अस्तुति करै सो भाट।

अस्तुति निंदा से अलग, सोई भक्त निराट॥

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साधु-साधु सब एक है, ठाकुर-ठाकुर एक।

संतन सों जो हित करै, सोई जान विवेक॥

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वृंदाबन में परि रहौ, देखि बिहारी-रूप।

तासु बराबर को करैं, सब भूपन कौ भूप॥

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कहा त्रिलोकी जस किये, कहा त्रिलोकी दान?

कहा त्रिलोकी बस किए, करी भक्ति निदान॥

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ना काहू सों रूसनो, ना काहू सों रंग।

ललितमोहिनीदास की, अद्भुत केलि अभंग॥

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Recitation

हिन्दवी उत्सव, 27 जुलाई 2025, सीरी फ़ोर्ट ऑडिटोरियम, नई दिल्ली

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