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क्षेमेंद्र

990 - 1070 | जम्मू कश्मीर

11वीं सदी के समादृत संस्कृत कवि, नाटककार, इतिहासकार, विचारक और आचार्य।

11वीं सदी के समादृत संस्कृत कवि, नाटककार, इतिहासकार, विचारक और आचार्य।

क्षेमेंद्र की संपूर्ण रचनाएँ

उद्धरण 27

स्त्रियाँ मनुष्यों को जन्म देने वाली किंतु प्राणों को हरने वाली भी हैं। ये भीरु स्वभाव वाली भी हैं तथा अग्नि में भी प्रवेश कर सकती हैं। ये अत्यंत कठोर भी हैं, साथ ही पल्लव के समान कोमल अंगों वाली भी हैं। वे सहज ही मुग्ध हो जाने वाली हैं किंतु विदग्ध जनों को ठग भी सकती हैं।

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संसार में शरीरधारियों की दरिद्रता ही मृत्यु है और ही आयु है।

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नीच पुरुष लाभ के उद्देश्य से प्रेम करते हैं। मनस्वी पुरुष मान के अभिलाषी होते हैं।

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सज्जन पुरुष धर्म के लिए ही प्रयत्नपूर्वक धन-संग्रह करते हैं।

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धन जीवन का सवोपरि साधन है अतः उसका नाश जीवन की हानि है।

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