Font by Mehr Nastaliq Web
noImage

Kriparam

کی

14
Favorite

باعتبار

अरुन नयन खंडित अधर, खुले केस अलसाति।

देखि परी पति पास तें, आवति बधू लजाति॥

  • विषय : 1
    اور 4 مزید

ऐसी आजु कहा भई, मो गति पलटे हाल।

जंघ जुगल थहरत चलत, डरति बिसूरति बाल॥

  • विषय : 1
    اور 1 مزید

सुरत करत पाइल बजै, लजै लजीली भूरि।

ननद जिठानी की सखी, हाँसी हिए बिसूरि॥

  • विषय : 1
    اور 1 مزید

एक ब्रह्ममय सब जगत, ऐसे कहत जु बेद।

कौन देत को लेत सखि, रति सुख समुझि अभेद॥

  • विषय : 1
    اور 1 مزید

कछु जोबन आभास तें, बढ़ी बधू दुति अंग।

ईंगुर छीर परात में, परत होत जो रंग॥

  • विषय : 1
    اور 1 مزید

वेद पुरान विरंचि सिव, महिमा कहत बिचारि।

ऐसे नंदकिसोर के, चरन कमल उरधारि॥

  • विषय : 1
    اور 1 مزید

बिरह सतावै रैन दिन, तऊ रटै तव नाम।

चातकि ज्यों स्वाती चहै, पाती चहै सुबाम॥

  • विषय : 1
    اور 1 مزید

खिझवति हँसति लजाति पुनि, चितवति चमकति हाल।

सिसुता जोबन की ललक, भरे बधूतन ख्याल॥

  • विषय : 1

भरि लोचन बोली प्रिया, कुंज ओट रिसठानि।

पाए जानि तुम्हें अबै, करत प्रीति की हानि॥

  • विषय : 1

बीति रैनि आए कहा, भोर भएँ धन देहु।

जओ जहाँ भावै तहाँ, यों बोली तजि नेहु॥

  • विषय : 1

Recitation

हिन्दवी उत्सव, 27 जुलाई 2025, सीरी फ़ोर्ट ऑडिटोरियम, नई दिल्ली

रजिस्टर कीजिए