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केदारनाथ सिंह

1934 - 2018 | बलिया, उत्तर प्रदेश

समादृत कवि-लेखक। भारतीय ज्ञानपीठ से सम्मानित।

समादृत कवि-लेखक। भारतीय ज्ञानपीठ से सम्मानित।

केदारनाथ सिंह की संपूर्ण रचनाएँ

कविता 26

उद्धरण 88

कवि को लिखने के लिए कोरी स्लेट कभी नहीं मिलती है। जो स्लेट उसे मिलती है, उस पर पहले से बहुत कुछ लिखा होता है। वह सिर्फ़ बीच की ख़ाली जगह को भरता है। इस भरने की प्रक्रिया में ही रचना की संभावना छिपी हुई है।

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कविता विचारहीन नहीं हो सकती, परंतु विचारात्मक प्रतिबद्धता को मैं कविता के लिए अनिवार्य नहीं मानता।

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मैं बोलता हूँ, इसलिए लिखता हूँ। मनुष्य के इतिहास में लिखना बोलने का अनुवर्ती है—लगभग यही बात रचना-प्रक्रिया पर भी लागू होती है।

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एक ख़ास तरह का मध्यवर्ग शहरों में विकसित होता रहा है, जो गाँवों से आया है। आधुनिक हिंदी साहित्य उन्हीं लोगों का साहित्य है।

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साहित्य में सच्ची प्रतिबद्धता वहीं जन्म लेती है, जहाँ कला लेखक की संवेदना और उसके वैचारिक झुकाव को एक विलक्षण जादुई संतुलन में बदल लेती है।

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वीडियो 14

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वीडियो का सेक्शन
शायर अपना कलाम पढ़ते हुए
कक्षा 12 - "दिशा" कविता की सप्रसंग व्याख्या / Explanation of Poem Disha / केदारनाथ सिंह / Kedaranath

केदारनाथ सिंह

केदारनाथ सिंह की कविता बनारस Class-12 Hindi Sahitya Antra Bhag-2 | Banaras Class 12

केदारनाथ सिंह

Recitation

हिन्दवी उत्सव, 27 जुलाई 2025, सीरी फ़ोर्ट ऑडिटोरियम, नई दिल्ली

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