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कलानन्द भट्ट

1941 - 1994 | दरभंगा, बिहार

मैथिलीक समादृत कवि-गजलकार। अपन रचनामे सामाजिक सरोकार आ प्रगतिशील चेतनाक लेल विशेष रूपसँ उल्लेखनीय। हिंदीमे सेहो लेखन।

मैथिलीक समादृत कवि-गजलकार। अपन रचनामे सामाजिक सरोकार आ प्रगतिशील चेतनाक लेल विशेष रूपसँ उल्लेखनीय। हिंदीमे सेहो लेखन।

कलानन्द भट्ट की ग़ज़लें

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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

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