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नागौर के रचनाकार

कुल: 12

मीरा

1498 - 1546

भक्तिकाव्य में कृष्ण भक्ति शाखा का चर्चित नाम। राज परिवार में जन्म लेकर भी रजवाड़ों में किए जा रहे स्त्री-शोषण के विरुद्ध खड़ी कवयित्री।

विश्नोई संप्रदाय के संस्थापक। पर्यावरणविद् और वैष्णव भक्ति के पोषक कवि।

उत्तर भारत में 'निरंजनी संप्रदाय' के संस्थापक। वाणियों में हठयोग और रहस्यवाद की छाप। भाषा सरल और प्रवाहपूर्ण।

रीतिकाल के नीतिकवि। हिंदी के पहले संबोधन काव्य के रचयिता। 'राजिया' को संबोधित सोरठों के लिए समादृत।

नई पीढ़ी के कवि।

आलोचक और शिक्षाविद्। प्रेमचंद-साहित्य के गंभीर अध्येता। संस्मारणात्मक कृति 'मेरी चिताणी' के लिए चर्चित।

भक्तिकाल के निर्गुण संतकवि। वाणियों में प्रेम, विरह, और ब्रह्म की साधना के गहरे अनुभव। जनश्रुतियों में संत दादू के अवतार।

अपने युग के आत्मज्ञानी जैन संत। पदों में कबीर का तीखा अंदाज और मीरा की मिठास दोनों एक साथ समाहित।

चर्चित कवि-लेखक। आलोचना और संपादन में भी सक्रिय।

राजस्थान के किसान परिवार में जन्म। आडंबरहीन, सरल व सीधी भाषा में ज्ञान मार्ग के गूढ़ तथ्यों को जनमानस के सामने रखा जिससे साधारण व बिना पढ़ा व्यक्ति भी मुक्ति का मार्ग अपना सके।

राजस्थान के जाट परिवार में जन्म। संत चतुरदास की शिष्या और मीरा की समकालीन। पदों में भक्ति की सरल अभिव्यक्ति।

सुप्रसिद्ध राजस्थानी कवि और संपादक। लंबी कविताओं के लिए उल्लेखनीय।

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