नंददुलारे वाजपेयी के लेख
आत्मकथा—एक विवाद
'जागरण' के पहले अंक में श्रीयुत प्रेमचंदजी ने अपने 'हंस' के आत्मकथांक के लिए लेख लिखते हुए 'भारत' की साहित्यिक नीति और लेखशैली को बहुत बुरे शब्दों में याद किया है। प्रेमचंद जी के उपन्यास उनकी प्रोपागेंडा-वृत्ति के कारण काफ़ी बदनाम हैं और हिंदी के बड़े-से-बड़े
श्री० सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'
यदि सामयिक हिंदी में कोई ऐसा विषय है जो अन्य सब विषयों की अपेक्षा अधिक क्लिष्ट और दुरूह समझा जा सके तो वह पं० सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' का विकास है। इस कवि के व्यक्तित्व और काव्य के निर्माण में ऐसे परमाणुओं का सन्निवेश हुआ है जिनका विश्लेषण हिंदी की
aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere