कामतानाथ की कहानियाँ
लाख की चूड़ियाँ
सारे गाँव में बदलू मुझे सबसे अच्छा आदमी लगता था क्योंकि वह मुझे सुंदर-सुंदर लाख की गोलियाँ बनाकर देता था। मुझे अपने मामा के गाँव जाने का सबसे बड़ा चाव यही था कि जब मैं वहाँ से लौटता था तो मेरे पास ढेर सारी गोलियाँ होतीं, रंग-बिरंगी गोलियाँ जो किसी भी
मकान
चाभी ताले में फँसा कर उसने उसे घुमाया तो उसने घूमने से क़तई इनकार कर दिया। उसने दुबारा ज़ोर लगाया परंतु कोई परिणाम नहीं निकला। अपनी जेबें टटोलना शुरू कर दीं। ऊपर वाली जेब में उसे स्टील का बाल प्वाइंट पेन मिल गया। उसने उसे जेब से निकाल कर चाभी के माथे
aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere