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H. G. Wells

1866 - 1946 | لندن

کی

धन—अन्य वस्तुओं के समान ही एक धोखा और निराशा है।

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अंतरराष्ट्रीयता राष्ट्रों का राष्ट्रवाद है।

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धन क्या है? निर्धनों का लूटा गया श्रम।

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हिन्दवी उत्सव, 27 जुलाई 2025, सीरी फ़ोर्ट ऑडिटोरियम, नई दिल्ली

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