किसी महान व्यक्ति के अनुयायी प्रायः अपनी आंखें बंद रखते हैं ताकि वे उसका गुणगान अधिक अच्छी रीति से कर सकें।
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विवेक का तक़ाज़ा है कि हम बेपरवाह हों; अवहेलना और उग्रता करने वाले बनें, क्योंकि मानवीय विवेक एक स्त्री के समान है जो योद्धा के अतिरिक्त और किसी को प्रेम नहीं करती।
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आलसी पाठकों से मुझे अत्यंत घृणा है।
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प्रत्येक मनुष्य जब पढ़ना सीखने की धृष्टता करने लगेगा तो उसको सहन करना एक ऐसी दुर्घटना होगी जिसके फलस्वरूप न केवल लेखन-कला ही, बल्कि विचार-शक्ति भी अंततः विकृत और क्षीण हो जाएगी।
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