चंदन पांडेय के बेला
कहानी : चोट
बुधवार की बात है, अनिरुद्ध जाँच समिति के समक्ष उपस्थित होने का इंतज़ार कर रहा था। चौथी मंजिल पर जहाँ वह बैठा था, उसके ठीक सामने पारदर्शी शीशे की दीवार थी। दफ़्तर की यह दीवार इतनी साफ़-शफ़्फ़ाक थी कि
1982 | देवरिया, उत्तर प्रदेश
नई पीढ़ी के सुपरिचित कहानीकार-उपन्यासकार। भारतीय ज्ञानपीठ के नवलेखन पुरस्कार से सम्मानित।
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