जीवनकाल में अत्यधिक वृद्धि का पक्ष लेने वालों के पास कोई वास्तविक समाधान नहीं है। सिवाए यह कहने कि जब समस्याएँ हमारे सामने आएँगी, तो हम उनसे निपटना सीख लेंगे। कुछ ने कहा कि अगर हमारे सामने जीवनकाल बहुत बढ़ जाने से जनसंख्या की समस्या पैदा होगी, तो हमें एक निश्चित उम्र पर पहुँच जाने के बाद, धरती छोड़कर किसी दूसरे ग्रह पर बस जाना चाहिए।
अबाधित रहे तो जनसंख्या गुणोत्तर अनुपात में बढ़ती है, किंतु खाद्य सामग्री गणितीय अनुपात में ही बढ़ती है।
aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere