Font by Mehr Nastaliq Web
Sundardas's Photo'

Sundardas

1596 - 1689 | راجستھان

کی

35
Favorite

باعتبار

सुंदर मन मृग रसिक है, नाद सुनै जब कांन।

हलै चलै नहिं ठौर तें, रहौ कि निकसौ प्रांन॥

  • विषय : 1
    اور 1 مزید

सुन्दर मन मृग रसिक है, नाद सुनै जब कान।

हलै चलै नहिं ठौर तें, रहौ कि निकसौ प्रांन॥

  • विषय : 1
    اور 1 مزید

मन ही बडौ कपूत है, मन ही महा सपूत।

सुन्दर जौ मन थिर रहै, तौ मन ही अबधूत॥

सुंदर बिरहनि अति दुखी, पीव मिलन की चाह।

निस दिन बैठी अनमनी, नैननि नीर प्रबाह॥

  • विषय : 1
    اور 1 مزید

सुमिरन तें श्रीपति मिलै, सुमिरन तें सुखसार।

सुमिरन तें परिश्रम बिना, सुन्दर उतरै पार॥

  • विषय : 1

बहुत छिपावै आप कौं, मुझे जांगै कोइ।

सुंदर छाना क्यौं रहै, जग में जाहर होइ॥

सुंदर दुर्जन सारिषा, दुखदाई नहिं और।

स्वर्ग मृत्यु पाताल हम, देखे सब ही ठौर॥

  • विषय : 1

जो कोउ मारै बान भरि, सुंदर कछु दुख नांहिं।

दुर्जन मारै बचन सौं, सालतु है उर मांहिं॥

  • विषय : 1

देह आप करि मांनिया, महा अज्ञ मतिमंद।

सुंदर निकसै छीलकै, जबहिं उचेरे कंद॥

सद्गुरु भ्राता नृपति कै, बेड़ी काटै आइ।

निगहबांन देखत रहैं, सुन्दर देहि छुड़ाइ॥

  • विषय : 1
    اور 3 مزید

दिस-दिस तें बादल उठे, बोलत चातक मोर।

सुन्दर चक्रित बिरहनी, चित्त रहै नहि ठौर॥

  • विषय : 1
    اور 3 مزید

राम नाम शंकर कह्यौ, गौरी कौं उपदेस।

सुंदर ताही राम कौं, सदा जपतु है सेस॥

  • विषय : 1
    اور 2 مزید

यौं मति जानै बावरे, काल लगावै बेर।

सुंदर सब ही देखतें, होइ राख की ढेर॥

  • विषय : 1
    اور 2 مزید

माता पिता लगावते, छाती सौं सब अंग।

सुन्दर निकस्यौ प्रान जब, कोउ बैठै संग॥

  • विषय : 1
    اور 2 مزید

संत मुक्त के पौरिया, तिनसौं करिये प्यार।

कूंची उनकै हाथ है, सुन्दर खोलहिं द्वार॥

  • विषय : 1
    اور 2 مزید

दया करहु अब रामजी, आवौ मेरै भौंन।

सुन्दर भागै दुःख सब, बिरह जाइ करि गौंन॥

  • विषय : 1
    اور 2 مزید

छपन कोटि आज्ञा करैं, मेघ पृथी पर आइ।

सुन्दर भेजैं रामजी, तहं-तहं वरषै जाइ॥

  • विषय : 1
    اور 2 مزید

सुन्दर मैली देह यह, निर्मल करी जाइ।

बहुत भांति करि धोइ तूं, अठसठि तीरथ न्हाइ॥

  • विषय : 1
    اور 2 مزید

सुन्दर भइया कहत हौ, मेरी दूजी बांह।

प्राण गयौ जब निकसि कैं, कोउ चंपै छांह॥

  • विषय : 1
    اور 2 مزید

चंच संवारी जिनि प्रभू, चूंन देइगो आंनि।

सुंदर तूं विश्वास गहि, छांडि आपनी बांनि॥

  • विषय : 1
    اور 2 مزید

कल परत पल एक हूँ, छाडे साँस उसाँस।

सुंदर जागी ख़्वाब सौं, देख तौ पिय पास॥

  • विषय : 1
    اور 1 مزید

सुंदर सद्गुरु शब्द का, ब्यौरि बताया भेद।

सुरझाया भ्रम जाल ते, उरझाया था बेद॥

  • विषय : 1
    اور 2 مزید

सुन्दर पक्षी वृक्ष पर, लियौ बसेरा आनि।

राति रहे दिन उठि गये, त्यौं कुटंब सब जानि॥

  • विषय : 1
    اور 2 مزید

सुन्दर माया मोह तजि, भजिये आतम राम।

ये संगी दिन चारि कै, सुत दारा धन धाम॥

  • विषय : 1
    اور 2 مزید

मेरै मंदिर माल धन, मेरौ सकल कुटुंब।

सुंदर ज्यौं को त्यौं रहै, काल दियौ जब बंब॥

  • विषय : 1
    اور 2 مزید

सुन्दर गर्व कहा करै, देह महा दुर्गंध।

ता महिं तूं फूल्यौ फिरै, संमुझि देखि सठ अंध॥

  • विषय : 1
    اور 2 مزید

सुन्दर ताला शब्द का, सद्गुरु खोल्या आइ।

भिन्न-भिन्न संमुझाय करि, दीया अर्थ बताइ॥

  • विषय : 1
    اور 2 مزید

सुन्दर तूं तौ एकरस, तोहि कहौं समुझाइ।

घटै बढै आवै रहै, देह बिनसि करि जाइ॥

सुंदर ग़ाफ़िल क्यौं फिरै, साबधान किन होय।

जम जौरा तकि मारि है, घरी पहरि मैं तोय॥

  • विषय : 1
    اور 2 مزید

सुन्दर अविनाशी सदा, निराकार निहसंग।

देह बिनश्वर देखिये, होइ पटक मैं भंग॥

मेरी मेरी करत है, तोकौं सुद्धि सार।

काल अचानक मारि है, सुंदर लगै बार॥

सुन्दर अति अज्ञान नर, समुंझत नहीं लगार।

जिनहि लडावै लाड़ तूं, ते ठोकि हैं कपार॥

  • विषय : 1
    اور 2 مزید

चमक-दमक सब मिटि गई, जीव गयौ जब आप।

सुंदर खाली कंचुकी, नीकसि भागौ सांप॥

करै करावै रामजी, सुन्दर सब घट माँहिं।

ज्यौं दर्पन प्रतिबिंब है, लिपै-छिपै कछु नाँहिं॥

  • विषय : 1
    اور 1 مزید

पल-पल छीजै देह यह, घटत-घटत घटि जाइ।

सुन्दर तृष्णा ना घटै, दिन-दिन नौतन थाइ॥

  • विषय : 1
    اور 1 مزید

भजन किये भगवंत बसि, डोली जन की लार।

सुंदर जैसे गाय कौं, बच्छा सौं अति प्यार॥

  • विषय : 1
    اور 1 مزید

तृष्णा बहै तरंगिनी, तरल तरी नहिं जाइ।

सुन्दर तीक्षण धार मैं, केते दिये बहाइ॥

  • विषय : 1
    اور 1 مزید

मारग जोवै बिरहनी, चितवै पिय की वोर।

सुंदर जियरै जक नहीं, कल परत निस भौर॥

  • विषय : 1
    اور 1 مزید

सुंदर भजि भगवंत कौं, उधरे संत अनेक।

सही कसौटी सीस पर, तजी अपनी टेक॥

  • विषय : 1
    اور 1 مزید

सुन्दर समझि विचार करि, तेरौ इनमैं कौंन।

आपु-आपु कौं जाहिगें, सुत दारा करि गौंन॥

  • विषय : 1
    اور 2 مزید

गोरखधंधा लोह मैं, कड़ी लोह ता मांहि।

सुन्दर जाने ब्रह्म मैं, ब्रह्म जगत द्वै नांहि॥

  • विषय : 1

सुन्दर सद्गुरु हैं सही, सुन्दर सिक्षा दीन्ह।

सुन्दर बचन सुनाइ कै, सुन्दर सुन्दर कीन्ह॥

तृष्णा डोलै ताकती, स्वर्ग मृत्यु पाताल।

सुन्दर तीनहुं लोक मैं, भरयौ एकहु गाल॥

  • विषय : 1
    اور 1 مزید

सुन्दर बंध्या देह सौं, कबहु छूटा भाजि।

और कियौ सनमंध अब, भई कोढ मैं खाजि॥

  • विषय : 1
    اور 2 مزید

सुन्दर पांणी सींचतौ, क्यारी कंण कै हेत।

चेतनि माली चलि गयौ, सूकौ काया खेत॥

  • विषय : 1
    اور 2 مزید

बेद नृपति की बंदि मैं, आइ परे सब लोइ।

निहगबांन पंडित भये, क्यों करि निकसै कोइ॥

हँसै बोलै नैक हूं, खाइ पीवै देह।

सुन्दर अंनसन ले रही, जीव गयौ तजि नेह॥

  • विषय : 1
    اور 2 مزید

सुन्दर हरि कै भजन तें, संत भये सब पार।

भवसागर नवका बिना, बूडत है संसार॥

  • विषय : 1
    اور 2 مزید

आयें हर्ष ऊपजै, गयें शोक नहिं होइ।

सुन्दर ऐसै संतजन, कोटिनु मध्ये कोइ॥

तृष्णा तूं बौरी भई, तोकों लागी बाइ।

सुन्दर रोकी नां रहै, आगै भागी जाइ॥

  • विषय : 1
    اور 1 مزید

Recitation

Jashn-e-Rekhta 10th Edition | 5-6-7 December Get Tickets Here

रजिस्टर कीजिए