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Shribhatt

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کی

तनिक धीरज धरि सकै, सुनि धुनि होत अधीन।

बंसी बंसीलाल की, बंधन कों मन-मीन॥

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जनम-जनम जिनके सदा, हम चक्कर निसि-भोर।

त्रिभुवन-पोषन सुधाकर, ठाकुर जुगल-किशोर॥

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मोहन दन ब्रजभूमि सब, मोहन सहज समाज।

मोहन जमुना कुंज तहँ, बिहरत श्रीब्रजराज॥

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हिन्दवी उत्सव, 27 जुलाई 2025, सीरी फ़ोर्ट ऑडिटोरियम, नई दिल्ली

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