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کی

पाणि चलणि रअ गइ, जीव दरे सग्गु।

वेण्णवि पन्था कहिअ मइ, जहिं जाणसि तहिं लग्गु॥

हाथ, पैर, शरीर ये सब धूल में समा जाते हैं। ये ही जीव की स्थिति है। स्वर्ग नहीं है। सरह कहते हैं—मैंने (स्वर्ग तथा नर्क) दोनों मार्ग बता दिए हैं, जो अच्छा लगे, उस पर चल।

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हिन्दवी उत्सव, 27 जुलाई 2025, सीरी फ़ोर्ट ऑडिटोरियम, नई दिल्ली

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