Font by Mehr Nastaliq Web
sant piipaa's Photo'

sant piipaa

1359 - 1420 | راجستھان

کی

18
Favorite

باعتبار

उठ भाग्यो वाराणसी, न्हायो गंग हजार।

पीपा वे जन उत्तम घणा, जिण राम कयो इकबार॥

  • विषय : 1
    اور 1 مزید

सगुण मीठौ खांड सौ, निरगुण कड़वौ नीम।

पीपा गुरु जो परसदे, निरभ्रम होकर जीम॥

  • विषय : 1

जीव मारि जीमण कर, खाताँ करै बखाण।

पीपा परतखि देखि ले, थांली माँहि मसाण॥

  • विषय : 1

पीपा पाप कीजिये, अलगौ रहिये आप।

करणी जासी आपणी, कुण बैटौ कुण बाप॥

  • विषय : 1

हाथाँ सो उधम करै, मुख सों उचरे नाम।

पीपा साधां रो धरम, रोम रमारे राम॥

पीपा भजतां राम ने, बस तेरस अर तीज।

भूमि पड्यां ही ऊगसी, उल्टो पल्टो बीज॥

  • विषय : 1
    اور 1 مزید

पग धोऊ उण देव का, जो घालि गुरु घाट।

पीपा तिनकू ना गिणूं, जिणरे मठ अर ठाठ॥

  • विषय : 1
    اور 2 مزید

सुआरथ के सब मीत रे, पग-पग विपद बढ़ाय।

पीपा गुरु उपदेश बिनुं, साँच जान्यो जाय॥

  • विषय : 1
    اور 2 مزید

नमूं तो गुरु अर राम कुँ, भव इतराते पार।

पीपा नमें आन कुँ, सुवारथ रो संसार॥

  • विषय : 1
    اور 2 مزید

राम नाम जियां जाणिया, पकड़ गुरु की धार।

पीपा पल में परसिया, खुलग्यो मुक्ति द्वार॥

  • विषय : 1
    اور 2 مزید

पीपा माया सब कथी, माया तो अणतोल।

कयां राम के नेहड़े, कयां राम के पोल॥

  • विषय : 1
    اور 2 مزید

पीपा कहत विचार हिरदै, राम सरिस नहिं आन।

जा सूँ कृपा उपजै हिरदै, विशद विवेक सुजान॥

  • विषय : 1
    اور 2 مزید

स्वारथ के सब ही सगा, जिनसो विपद जाय।

पीपा गुरु उपदेश बिनु, राम जान्यो जाय॥

  • विषय : 1
    اور 2 مزید

पीपा पी पथ निरखता, आँखा झाँई पड़ी।

अभी पी अडग अलख लखूँ, अडिकूं घड़ी-घड़ी॥

  • विषय : 1
    اور 2 مزید

निज को जो चाहे सुखी, हुवो चहै दुख हीन।

तो भज ले श्रीराम को, पीपा रहै दीन॥

  • विषय : 1
    اور 2 مزید

साँच मंत्र तो राम भज, और सभी कुछ कूड़।

पीपा वेद पुराण पढूं, क्यों बन्यो रहे मूढ॥

  • विषय : 1
    اور 2 مزید

सतगुरु जी री खोहड़ी, लागी म्हारे अंग।

पीपा जुड़ग्या पी लगन, टूटी भरम तरंग॥

  • विषय : 1
    اور 2 مزید

पीपा हरि प्रसाद तें, पायो ज्ञान अनंत।

भव सागर ने पार कर, दुख को आयो अंत॥

  • विषय : 1
    اور 2 مزید

सुमिरण साँचो छोड़ के, अंतर मन ही होय।

पीपा तन सुध बिसरे, प्रेम छलै कोय॥

  • विषय : 1
    اور 1 مزید

पीपा माया नागणी, मन में धरौ बिसाल।

जिन जिन दूध परोसियो, उण रो करियो नास॥

  • विषय : 1
    اور 1 مزید

कुंजा ज्यों कुरल्या करै, बिरही जणा को जीव।

पेपा आगि बुझ सके, जब लग मिले पीव॥

  • विषय : 1
    اور 2 مزید

पीपा राम प्रताप ते, सागर जल के माँह।

पत्थर तिरे तरूपांत ज्यूँ, नर की बातें कांह॥

  • विषय : 1
    اور 2 مزید

स्वामी होणौ सहज है, दुर्लभ होणौं दास।

पीपा हरि के नाम बिन, कटै जम की फाँस॥

  • विषय : 1
    اور 1 مزید

भलौ बुरौ सब एक है, जाके आदि अंत।

जगहित जो हरि को सैवये, पीपा सोई संत॥

  • विषय : 1
    اور 1 مزید

जातां भव मझधार में, आयौ दुख रो अंत।

पीपा गुरु परसाद ते, पायो पिया अनंत॥

  • विषय : 1
    اور 1 مزید

पीपा गुरु हरि एक है, इणमां भेद भूल।

जै इण में अंतर करै, तिन के हिरदै सूल॥

  • विषय : 1
    اور 1 مزید

भजत दुख मोचन करण, हरण सफल जंजाल।

पीपा क्यों नहिं भजत नर, निस दिन राम कपाल॥

  • विषय : 1
    اور 1 مزید

माला मणका क्या गिनूं, यह तो सुमरण धाम।

पीपा को हरि सुमरै, पीपा सुमरे राम॥

  • विषय : 1
    اور 1 مزید

बण्यो बणायो रहे सदा, काटत है नहिं शूल।

अरुण वरुण क्या काम को, बास बिना को फूल॥

  • विषय : 1
    اور 1 مزید

पीपा मन हरख्यौं फिरै, समझे नहीं गंवार।

राम बिना जाणै नहीं, पावाँ तणा पहार॥

  • विषय : 1
    اور 1 مزید

साँचा साँई परचिया, सतगुरु संत सहार।

पीपा प्रणवै वाहि को, जो सबको करतार॥

  • विषय : 1
    اور 1 مزید

राम नाम सुमरत भये, रंक बँक बजरंग।

ध्रुव प्रह्लाद गीधगज, तजकुल को परसंग॥

  • विषय : 1
    اور 1 مزید

पीपा देर कीजिये, भज लीजे हरि नाम।

कुण जाणै क्या होवसी, छूट जाएँगे प्रान॥

  • विषय : 1
    اور 1 مزید

पीपा देख विचार हिय, है यह मतो प्रवीन।

समचित रह संसार में, राम रसायन लीन॥

  • विषय : 1
    اور 1 مزید

निज सुत को माता पिता, करे भलो उपदेस।

पीपा एकल राम बिनु, मिटै जग रौ क्लेस॥

  • विषय : 1
    اور 1 مزید

पीपा के पिंजरि बस्यो, रामानंद को रूप।

सबै अंधेरा मिटि गया, देख्या रतन अनूप॥

  • विषय : 1
    اور 1 مزید

लघुता प्रभुता जो गिणै, गुरु से विनसे भरम।

सत सबद ने राखलूँ, पीपा सिख रो धरम॥

  • विषय : 1
    اور 1 مزید

पीपा हरि सो गुरु बिना, होत सबद विवेक।

ज्ञान रहित अज्ञान सुत, कठिन कुमन की टेक॥

  • विषय : 1
    اور 1 مزید

उग्यो बिरहा जिण हिवरे, रोमां माइन राम।

चातक ज्यूं पी नै रटै, पीपा आठहुँ धाम॥

  • विषय : 1
    اور 1 مزید

पीपा भज श्रीराम को, परिहर अखिल विचार।

आजस तज या मनुज तनु, क्यों गिरता संसार॥

  • विषय : 1
    اور 1 مزید

जिणरो रूप रंग अंग, करण मरण अर जीव।

रंग बास बन ज्यों रमै, अस पीपे को जीव॥

  • विषय : 1

पीपा जिनके मन कपट, तन पर ऊजरौ भेस।

तिन को मुख कारौ करो, संत जनां का लेख॥

पीपा माया नारी परहरै, चित तूं धरै उतारि।

ते नर गोरखनाथ ज्यूँ, अमर भया संसारि॥

  • विषय : 1

पीपा दास कहाबो कठिन है, मन नहिं छांड़े मानि।

सतगुरू सूँ परचौ नही, कलियुग लागौ कानि॥

  • विषय : 1

सतगुरू साँचो जोहरी, परसे ज्ञान कसौट।

पीपा सुधो करे, दे अणभौरी चोट॥

  • विषय : 1

पीपा थौड़े अंतरै, घणी बिगूती लोई।

महामाई मान्या घणा, तार यौ नाहीं कोई॥

पीपा पारस परसताँ, लोहा कंचन होई।

सिद्ध के कांठे बैसताँ, साधक भी सिद्ध होई॥

  • विषय : 1

पीपा सिख दे जगत कूं, काठे सब रो बाँक।

पेख्या पलक उघाड़ कै, अपणौ अंतर झाँक॥

पीपा मणको काठ रो, बीच पिरोवे सूत।

सुमरणी निरदोषणी, के रण हार कपूत॥

  • विषय : 1

पीपा परनारी परतखि छुरी, बिरला बंचै कोई।

नाँ पेटि संचारिऐ, सो सेना की होई॥

Recitation

हिन्दवी उत्सव, 27 जुलाई 2025, सीरी फ़ोर्ट ऑडिटोरियम, नई दिल्ली

रजिस्टर कीजिए