Font by Mehr Nastaliq Web
noImage

Samuel Taylor Coleridge

1772 - 1834

تمام تمام

10

मुक्त वायु में सुप्त शिशिर अपने सस्मित अधरों पर वसंत का स्वप्न देखता है।

  • New Home Share this Hindwi

ऐसा क्यों है और ऐसा क्यों नहीं—इसका कारण बताने वाली बात स्थायी रूप से आनंद नहीं दे सकती।

  • New Home Share this Hindwi

भाषा मानव मस्तिष्क की वह शस्त्रशाला है जिसमें अतीत की सफलताओं के जयस्मारक और भावी सफलताओं के लिए अस्त्र-शस्त्र, एक सिक्के के दो पहलुओं की तरह साथ-साथ रहते हैं।

  • New Home Share this Hindwi

कल्पना का विचार मैं प्राथमिक तथा परवर्ती के रूप में करता हूँ। प्राथमिक कल्पना को मैं समस्त मानवीय ज्ञान की जीवंत शक्ति और प्रमुख कारक, तथा अनंत 'अहम् अस्मि' में होने वाली शाश्वत सृजन-प्रक्रिया की शांत मन में आवृत्ति मानता हूँ। द्वितीयक कल्पना को मैं प्राथमिक कल्पना की प्रतिध्वनि मानता हूँ, जो चेतन संकल्प-शक्ति के साथ अस्तित्त्वशील है, और फिर भी प्राथमिक कल्पना से कारकता के प्रकार में तादात्म्यशील होती है, और केवल मात्रा में तथा क्रियाविधि में उससे भिन्न होती है। पुनः सृजन के निमित्त यह विघटित करती है, प्रसारित करती है तथा क्षय करती है; या जहाँ यह प्रक्रिया असंभव हो जाती है वहाँ भी यह प्रत्ययीकरण तथा एक करने के लिए संघर्ष को सदैव करती है। यह अनिवार्यतः सजीव होती है, वैसे ही जैसे सभी वस्तुएँ वस्तुओं के रूप में स्थिर और निर्जीव होती हैं।

  • New Home Share this Hindwi

पारंगत दार्शनिक हुए बिना कोई भी व्यक्ति कभी महान कवि नहीं हुआ।

  • New Home Share this Hindwi

Recitation

हिन्दवी उत्सव, 27 जुलाई 2025, सीरी फ़ोर्ट ऑडिटोरियम, नई दिल्ली

रजिस्टर कीजिए