Font by Mehr Nastaliq Web
noImage

Ray Deviprasad 'purn'

کی

सरस-सरस बरसत सलिल, तरस-तरस रहि बाम।

झरस-झरस बिरहागि सों, बरस-बरस भे जाम॥

  • विषय : 1
    اور 1 مزید

तिय तन लखि मोहित तड़ित, गति अद्भुत लखि जात।

बार-बार लखि तिय छटा, छन प्रकाश रहि जात॥

सारंग झरि सारंग रव, सुखद स्याम सारंग।

विहरत बर सारंग मिलि, सरसत बरसा रंग॥

  • विषय : 1

प्रिय सुकुमारि कुमारि हित, भय मय तिमिर बिचार।

प्रेम विवश देवांगना, करहिं जगत उजियार॥

सुनि-सुनि नवला रूप गुन, करि दरसन अभिलास।

सुर दारा छित जोवहीं, करि-करि गगन प्रकास॥

रामावर आराम में, लखी परम अभिराम।

भो हराम आराम सब, परो राम सों काम॥

  • विषय : 1

Recitation

हिन्दवी उत्सव, 27 जुलाई 2025, सीरी फ़ोर्ट ऑडिटोरियम, नई दिल्ली

रजिस्टर कीजिए