Font by Mehr Nastaliq Web
noImage

Jhamdas

کی

राम भजन तैं काम सब, उभय लोक आनंद।

तातै भजु मन! मूढ़ अब, छोड़ि सकल जग फंद॥

  • विषय : 1
    اور 3 مزید

अधम उधारन राम के, गुन गावत श्रुति साधु।

'झामदास' तजि त्रास तेहि, उर अंतर अवराधु॥

  • विषय : 1
    اور 2 مزید

एहि कलि पारावार महँ, परौ पावत पार।

'झाम' राम गुन गान तैं, बिनु प्रयास निस्तार॥

  • विषय : 1
    اور 2 مزید

कलि कानन अघ ओघ अति, विकट कुमृगन्ह समानु।

हरि जस अनल लहै इतै, ग्यान बिराग कृपानु॥

  • विषय : 1
    اور 1 مزید

'झाम' राम सुमिरन बिना, देह आवै काम।

इतै उतै सुख कतहुँ नहिं, जथा कृपिन कर दाम॥

  • विषय : 1
    اور 1 مزید

कलि मल हरन सरीर अति, नहिं लखि अपर उपाइ।

एह रघुपति गुन सिंधु मरु, मजत उज्जलताइ॥

  • विषय : 1
    اور 1 مزید

Recitation

हिन्दवी उत्सव, 27 जुलाई 2025, सीरी फ़ोर्ट ऑडिटोरियम, नई दिल्ली

रजिस्टर कीजिए