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Hridayram

تمام تمام

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सुख सागर नागर नवल, कमल बदन द्युतिमैन

करुणा कर वरुणादिपति, शरणागत सुख दैन॥

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खंजन लोचन कंज मुख, नित खंडन पर पीर।

अरि गंजन भंजन धनुष, भव रंजन रघुवीर॥

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