Font by Mehr Nastaliq Web

تمام تمام

4

रसना कटौ जु अन रटौ, निरखि अन फुटौ नैन।

स्रवन फुटौ जो अन सुनौ, बिनु राधा-जसु बैन॥

  • New Home Share this Hindwi

सबसौ हित निहकाम मन, बृंदाबन बन विस्राम।

राधावल्लभ लाल कौ, हृदय ध्यान, मुख नाम॥

  • New Home Share this Hindwi

तनहिं राखु सतसंग में, मनहिं प्रेमरस भेव।

सुख चाहत ‘हरिवंस हित', कृष्ण-कल्पतरु सेव॥

  • New Home Share this Hindwi

निकसि कुंज ठाढ़े भये, भुजा परस्पर अंस।

राधावल्लभ-मुख-कमल,निरखत ‘हित हरिबंस'॥

  • New Home Share this Hindwi

15

1

 

1

 

Recitation

Jashn-e-Rekhta 10th Edition | 5-6-7 December Get Tickets Here

रजिस्टर कीजिए