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Hariram Vyas

1510 - 1632 | دوسرا, مدھیہ پردیش

تمام تمام

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‘व्यास’ कथनी और की, मेरे मन धिक्कार।

रसिकन की गारी भली, यह मेरौ सिंगार॥

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‘व्यास’ बचन मीठे कहै, खरबूजा की भाँति।

ऊपर देखौ एक सौ, भीतर तीन्यों पाँति॥

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मुख मीठी बातें कहै, हिरदै निपट कठोर।

व्यास कहौं क्यों पाय हैं, नागर नंदकिसोर॥

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‘व्यास’ बड़ाई लोक की, कूकर की पहिचानि।

प्रीति करै मुख चाटही, बैर करै तनु-हानि॥

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‘व्यास’ मिठाई विप्र की, तामे लागै आगि।

बृंदाबन ते स्वपच की, जूठहि खैए माँगि॥

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Recitation

हिन्दवी उत्सव, 27 जुलाई 2025, सीरी फ़ोर्ट ऑडिटोरियम, नई दिल्ली

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