Font by Mehr Nastaliq Web
noImage

Goswami Vitthalnath

کی

हे प्रभु! आप चाहे संतुष्ट हों या रुष्ट, मेरे तो आश्रय आप ही हैं। हम दोनों को मारने या स्वीकार करने में आप ही हमारी गति हैं।

Recitation

हिन्दवी उत्सव, 27 जुलाई 2025, सीरी फ़ोर्ट ऑडिटोरियम, नई दिल्ली

रजिस्टर कीजिए