Font by Mehr Nastaliq Web
noImage

Bulla Sahab

کی

आठ पहर चौंसठ घरी, जन बुल्ला घर ध्यान।

नहिं जानो कौनी घरी, आइ मिलैं भगवान॥

  • विषय : 1

अछै रंग में रंगिया, दीन्ह्यो प्रान अकोल।

उनमुनि मुद्रा भस्म धरि, बोलत अमृत बोल॥

जग आये जग जागिये, पागिये हरि के नाम।

बुल्ला कहै बिचारि कै, छोड़ि देहु तन धाम॥

  • विषय : 1

बिना नीर बिनु मालिहीं, बिनु सींचे रंग होय।

बिनु नैनन तहँ दरसनो, अस अचरज इक सोय॥

बोलत डोलत हँसि खेलत, आपुहिं करत कलोल।

अरज करों बिन दामहीं, बुल्लहिं लीजै मोल॥

Recitation

हिन्दवी उत्सव, 27 जुलाई 2025, सीरी फ़ोर्ट ऑडिटोरियम, नई दिल्ली

रजिस्टर कीजिए