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Birbal

1528 - 1585

کی

नमे तुरी बहुतेज नमे दाता धन देतो।

नमे अंब बह फल्यो नमे जलधर बरसेतो।

नमे सुकवि जन शुद्ध नमे कुलवँती नारी।

नमे सिंह गज हने नमे गज बैल सम्हारी।

कुंदन इमि कसियो नमे वचन ब्रह्म सच्चा भनै।

पर सूखा काठ अजान नर टूट पड़े पर नहिं नमे॥

  • विषय : 1

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हिन्दवी उत्सव, 27 जुलाई 2025, सीरी फ़ोर्ट ऑडिटोरियम, नई दिल्ली

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