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तजि आसा तन, प्रान की, दीपै मिलत पतंग।

दरसाबत सब नरन कों, परम प्रेंम कौ ढंग॥

  • विषय : 1

जीबन-लाभ हमें, लखै स्याम-तिहारी काँति।

बिनाँ स्याम-घन-छन प्रभा, प्रभा लहै किहि भाँति॥

  • विषय : 1

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