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Bhartṛhari

570 AD - 651 AD | اجین, مدھیہ پردیش

تمام تمام

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बड़ाई, पंडिताई, विवेकता और कुलीनता—ये सब मनुष्य के देह में तभी तक रहती हैं, जबतक शरीर में कामागिन नहीं प्रज्वलित होती। जब तक आदमी कामपीड़ित नहीं होता, तभी तक उसे अपने गौरव, विद्वत्ता, उच्च कुल की उत्पत्ति और सदाचार का ज्ञान रहता है।

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चिंतन में प्रेयसी का चिंतन सर्वश्रेष्ठ है।

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स्त्रियाँ जब प्रेम में आकर सही या ग़लत कुछ भी ठान लेती हैं, तो उनको ऐसा करने से ब्रह्मा भी नहीं रोक सकता है।

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कहीं सत्य, कहीं असत्यवादी, कहीं कठोर, कहीं प्रियभाषिणी, कहीं हिंसा करने वाली, कहीं दयालु, कहीं लोभी, कहीं उदार, कहीं नित्य प्रति बहुत द्रव्य व्यय करने वाली और कहीं बहुत से संचय करने वाली यह राजनीति—वेश्या के सामान अनेक रूप से रहती है।

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फूलों के गुच्छों के समान स्वाभिमानी मनस्वी पुरुषों की भी दो तरह की स्थिति होती है, या तो समाज में सर्वोपरि स्थान प्राप्त करते हैं, या समाज से दूर रहकर एकांत में अपना जीवन व्यतीत करते हैं।

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کتاب 1

 

Recitation

हिन्दवी उत्सव, 27 जुलाई 2025, सीरी फ़ोर्ट ऑडिटोरियम, नई दिल्ली

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