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Ambikadatt Vyas

1858 - 1900 | جے پور, راجستھان

تمام تمام

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गुंजा री तू धन्य है, बसत तेरे मुख स्याम।

यातें उर लाये रहत, हरि तोको बस जाम॥

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मोर सदा पिउ-पिउ करत, नाचत लखि घनश्याम।

यासों ताकी पाँखहूँ, सिर धारी घनश्याम॥

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पुनः हिमालय के शिखर पर और समुद्र के तट पर भारतवासियों की विजय पताका फहराए और भारतीयों की भेरी का शब्द फ़ारस-वासियों अरबों, कम्बोज देशवासियों, त्रिवृत्तदेशवासियों, चीनियों, बर्मावासियों, तथा सिंहलदेश-वासियों के कानों तक पहुँचे।

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हिन्दवी उत्सव, 27 जुलाई 2025, सीरी फ़ोर्ट ऑडिटोरियम, नई दिल्ली

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