Font by Mehr Nastaliq Web
noImage

ramrasrangmani

کی

बंदौं दूलह वेष दुति, सिय दुलहिनि युत राम।

गौरि श्याम रसरंगमणि, जन-मन पूरन काम॥

  • विषय : 1
    اور 2 مزید

बंदौं सिंहासन लसे, दुलहिनि दूलह चारि।

पूजहिं अंब कदंब लखिं, रसरंगहु बलिहारि॥

  • विषय : 1
    اور 2 مزید

बंदौं सीताकांत सुख, रस शृंगार स्वरूप।

रसिकराज रसरंगमणि, सखा सुबंधु अनूप॥

  • विषय : 1
    اور 2 مزید

बन्दौं भरताग्रज मधुर, प्रेम सख्य रस रूप।

कृपासिंधु रसरंगमणि, बंधु अखिल रस भूप॥

  • विषय : 1
    اور 1 مزید

बंदौं बर दुलहिनि सकल, आए अवध दुआर।

मुदित मातु परिछन करहिं, सुख रसरंग अपार॥

  • विषय : 1
    اور 1 مزید

Recitation

हिन्दवी उत्सव, 27 जुलाई 2025, सीरी फ़ोर्ट ऑडिटोरियम, नई दिल्ली

रजिस्टर कीजिए