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Mahavir

599 - 527 | دوسرا, بہار

تمام تمام

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आठ बातों से मनुष्य शिक्षित कहलाता है: हर समय हँसने वाला हो, सतत इंद्रिय-निग्रही हो, मर्मान्तक वचन कहता हो, सुशील हो, दुराचारी हो, रसलोलुप हो, सत्य में रत हो, क्रोधी हो, शांत हो—वह शिक्षित है।

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जो स्वयं प्राणियों की हिंसा करता है, दूसरो से हिंसा कराता है और हिंसा करने वालों का अनुमोदन करता है, वह संसार में अपने लिए बैर ही बढ़ाता है।

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जो वीर दुर्जय संग्राम में लाखों योद्धाओं को जीतता है, यदि वह एक अपनी आत्मा को जीत ले, तो यह उसकी सर्वश्रेष्ठ विजय है।

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पाँच इंद्रियों, क्रोध, मान, माया, लोभ और सबसे अधिक दुर्जय अपनी आत्मा को जीतना चाहिए। एक आत्मा के जीत लेने पर सब कुछ जीत लिया जाता है।

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धर्म सर्वश्रेष्ठ मंगल है। धर्म का अर्थ है—अहिंसा, संयम और तप। जिसका मन सदा धर्म में लगा रहता है, देवता भी उसे नमस्कार करते हैं।

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Recitation

हिन्दवी उत्सव, 27 जुलाई 2025, सीरी फ़ोर्ट ऑडिटोरियम, नई दिल्ली

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