کی
अध्ययन की कला होती है, चिंतन की भी कला होती है और लेखन की भी कला होती है।
यदि किसी प्रतिभाशाली लेखक से यह पूछा जाए कि उसकी कृति में किस पृष्ठ ने उसको अधिकतम उलझाया था तो बहुधा वह मुखपृष्ठ की ओर ही संकेत करेगा।
महापुरुषों के दोष मूर्खो के लिए सांत्वनाप्रद होते हैं।
उद्धरणों के द्वारा बुद्धिमानों की बुद्धिमत्ता तथा युग-युग के अनुभवों को सँजोया जा सकता है।