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Bulla Sahab

تمام تمام

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आठ पहर चौंसठ घरी, जन बुल्ला घर ध्यान।

नहिं जानो कौनी घरी, आइ मिलैं भगवान॥

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अछै रंग में रंगिया, दीन्ह्यो प्रान अकोल।

उनमुनि मुद्रा भस्म धरि, बोलत अमृत बोल॥

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बिना नीर बिनु मालिहीं, बिनु सींचे रंग होय।

बिनु नैनन तहँ दरसनो, अस अचरज इक सोय॥

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बोलत डोलत हँसि खेलत, आपुहिं करत कलोल।

अरज करों बिन दामहीं, बुल्लहिं लीजै मोल॥

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जग आये जग जागिये, पागिये हरि के नाम।

बुल्ला कहै बिचारि कै, छोड़ि देहु तन धाम॥

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Recitation

हिन्दवी उत्सव, 27 जुलाई 2025, सीरी फ़ोर्ट ऑडिटोरियम, नई दिल्ली

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