Font by Mehr Nastaliq Web

تمام تمام

42

बलधन मैं सिंह ना लसैं, ना कागन मैं हंस।

पंडित लसै मूढ़ मैं, हय खर मैं प्रशंस॥

  • New Home Share this Hindwi

रोगी भोगी आलसी, बहमी हठी अज्ञान।

ये गुन दारिदवान के, सदा रहत भयवान॥

  • New Home Share this Hindwi

मनुख जनम ले क्या किया, धर्म अर्थ काम।

सो कुच अज के कंठ मैं, उपजे गए निकाम॥

  • New Home Share this Hindwi

अधिक सरलता सुखद नहिं, तेखो विपिननिहार।

सीधे बिरवा कटि गए, बाँके खरे हजार॥

  • New Home Share this Hindwi

बोलि उठै औसर बिना, ताका रहै मान।

जैसैं कातिक बरसतैं, निंदैं सकल जहान॥

  • New Home Share this Hindwi

"راجستھان" کے مزید poets

Recitation

हिन्दवी उत्सव, 27 जुलाई 2025, सीरी फ़ोर्ट ऑडिटोरियम, नई दिल्ली

रजिस्टर कीजिए