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تمام تمام

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तजि आसा तन, प्रान की, दीपै मिलत पतंग।

दरसाबत सब नरन कों, परम प्रेंम कौ ढंग॥

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जीबन-लाभ हमें, लखै स्याम-तिहारी काँति।

बिनाँ स्याम-घन-छन प्रभा, प्रभा लहै किहि भाँति॥

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Recitation

हिन्दवी उत्सव, 27 जुलाई 2025, सीरी फ़ोर्ट ऑडिटोरियम, नई दिल्ली

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