आँख न हो मनुष्य हृदय से देख सकता है, पर हृदय न होने से आँख बेकार है।
New Home Share this Hindwi
चरित्र पालन सभ्यता का प्रधान अंग है। कौम की सच्ची तरक्की तभी कहलावेगी, जब हर एक आदमी उस जाति या कौम के चरित्र-संपन्न और भलमनसाहत की कसौटी में कसे हुए अपने को प्रगट कर सकते हों।
New Home Share this Hindwi
मन के पवित्र या अपवित्र करने का द्वार नेत्र है।
New Home Share this Hindwi
आँख में आँसू उन्हीं अकुटिल सीधे सत्पुरुषों के आता है, जिनके सच्चे सरल चित्त में कपट और कुटिलाई ने स्थान नहीं पाया है।
New Home Share this Hindwi
मन जब अकलुषित और स्वस्थ है, तभी विविध ज्ञान उसमें उत्पन्न होते हैं—व्यग्र हो जाने पर नहीं।
You have exhausted your 5 free content pages. Register and enjoy UNLIMITED access to the whole universe of Urdu Poetry, Rare Books, Language Learning, Sufi Mysticism, and more.