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Balkrishna Bhatt

1844 - 1914 | الہٰ آباد, اتر پردیش

تمام تمام

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आँख हो मनुष्य हृदय से देख सकता है, पर हृदय होने से आँख बेकार है।

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चरित्र पालन सभ्यता का प्रधान अंग है। कौम की सच्ची तरक्की तभी कहलावेगी, जब हर एक आदमी उस जाति या कौम के चरित्र-संपन्न और भलमनसाहत की कसौटी में कसे हुए अपने को प्रगट कर सकते हों।

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मन के पवित्र या अपवित्र करने का द्वार नेत्र है।

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आँख में आँसू उन्हीं अकुटिल सीधे सत्पुरुषों के आता है, जिनके सच्चे सरल चित्त में कपट और कुटिलाई ने स्थान नहीं पाया है।

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मन जब अकलुषित और स्वस्थ है, तभी विविध ज्ञान उसमें उत्पन्न होते हैं—व्यग्र हो जाने पर नहीं।

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کتاب 5

 

Recitation

हिन्दवी उत्सव, 27 जुलाई 2025, सीरी फ़ोर्ट ऑडिटोरियम, नई दिल्ली

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