जो जीव अपने पक्ष को छोड़कर सद्गुरु के चरण में समर्पित होता है, वह जीव निज शुद्धात्मा के आश्रय से परमपद को पाता हैं।
New Home Share this Hindwi
आत्मभ्रांति के समान कोई रोग नहीं है। सद्गुरु के समान कोई वैद्य नहीं है। सद्गुरु की आज्ञा के समान कोई उपचार नहीं हैं। विचार और ध्यान के समान कोई औषधि नहीं है।
New Home Share this Hindwi
मतार्थी जीव को आत्मज्ञान नहीं होता है।
New Home Share this Hindwi
श्री वीतरागी भगवान ने ऐसा जो विनय का मार्ग कहा है, उस मार्ग के मूल आशय को कुछ ही सौभाग्यशाली जीव समझते हैं। यदि असद्गुरु उस विनय का दुरुपयोग करे, तो महामोहनीय कर्म के फल में भवसागर में डूबता है।
New Home Share this Hindwi
भूतकाल में जो ज्ञानी हुए, वर्तमान जो ज्ञानी है एवं भविष्य में जो ज्ञानी होंगे—उनके ज्ञानी होने में कोई मार्गभेद नहीं है।
You have exhausted your 5 free content pages. Register and enjoy UNLIMITED access to the whole universe of Urdu Poetry, Rare Books, Language Learning, Sufi Mysticism, and more.