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Jaun Elia

1931 - 2002 | امروہا, اتر پردیش

تمام تمام

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तुम्हारा हर काम और हर खेल मग़रिबी (पश्चिमी) है, तुम हारे तो क्या और जीते तो क्या! बल्कि दुःख तो ये है कि तुम उनकी नक़ल उतारने में कभी-कभी जीत भी जाते हो।

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एक शख़्स अपनी ख़ुशी के लिए दूसरे का दिल दुखाता है।

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मैं भी बहुत अजीब हूँ, इतना अजीब हूँ कि बस, ख़ुद को तबाह कर लिया और मलाल भी नहीं।

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इस समाज में हमारी दाहिनी तरफ़ भी झूठ है और बाईं तरफ़ भी। सामने भी और पीछे भी, झूठ ही झूठ है जिसके सबब ये झल्लाहटें हैं और खोट ही खोट है जिसके बाइस ये झुँझलाहटें हैं।

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इस समाज में जो आदमी बुरा नहीं है वो बेवक़ूफ़ है।

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Recitation

हिन्दवी उत्सव, 27 जुलाई 2025, सीरी फ़ोर्ट ऑडिटोरियम, नई दिल्ली

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