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Satyanarayan Kaviratna

1879 - 1918 | علی گڑھ, اتر پردیش

تمام تمام

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चित चिंता तजि, डारिकैं, भार, जगत के नेम।

रे मन, स्यामा-स्याम की, सरन गहौ करि प्रेम॥

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मकराकृत कुंडल स्रवन, पीतवरन तन ईस।

सहित राधिका मो हृदय, बास करो गोपीस॥

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पीतपटी लपटाय कैं, लैं लकुटी अभिराम।

बसहु मंद मुसिक्याय उर, सगुन-रूप घनस्याम॥

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श्रीराधा वृषभानुजा, कृष्ण-प्रिया हरि-सक्ति।

देहु अचल निज पदन की, परमपावनी भक्ति॥

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सजल सरल घनस्याम अब, दीजै रस बरसाय।

जासों ब्रजभाषा-लता, हरी-भरी लहराय॥

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Recitation

हिन्दवी उत्सव, 27 जुलाई 2025, सीरी फ़ोर्ट ऑडिटोरियम, नई दिल्ली

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