भारत में सौंदर्यशास्त्रीय तथा धार्मिक भावनाएँ व मूल्य एकीकृत हो गए हैं जिससे वे अनुभूति के उस आयाम तक पहुँचे जिसमें बुद्धि और भाव दोनों चरम उत्कर्ष प्राप्त करते हैं।
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भारत में कला जीवन के सभी क्षेत्रों-सामाजिक, नैतिक और कलात्मक क्षेत्रों को तत्त्वदर्शनपरक सत्य और मूल्य प्रदान करती है। उसमें तात्कालिक और चरम, सांसारिक और दिव्य, यहाँ तक कि इंद्रियगत और अनुभवातीत तथा भुक्ति और मुक्ति के बीच कोई विरोध नहीं है।
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