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Nagridas

1699 - 1764 | اجمیر, راجستھان

تمام تمام

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अरे पियारे, क्या करौ, जाहि रहो है लाग।

क्योंकरि दिल-बारूद में, छिपे इस्क की आग॥

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इस्क-चमन महबूब का, जहाँ जावै कोइ।

जावै सो जीवै नहीं, जियै सु बौरा होइ॥

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सीस काटिकै भू धरै, ऊपर रक्खै पाव।

इस्क-चमन के बीच में, ऐसा हो तो आव॥

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थिर कीन्हेंचर,चर सुथिर, हरि-मुख मुरली बाजि।

खरब सुकीनो सबनि कों, महागरब सों गाजि॥

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कहूँ किया नहिं इस्क का, इस्तैमाल सँवार।

सो साहिब सों इस्क वह, करि क्या सकै गँवार॥

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हिन्दवी उत्सव, 27 जुलाई 2025, सीरी फ़ोर्ट ऑडिटोरियम, नई दिल्ली

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