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Giridharan

1833 - 1860 | بنارس, اتر پردیش

تمام تمام

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आप करै उपकार अति, प्रति उपकार चाह।

हियरो कोमल संत सम, सुहृद सोइ नरनाह॥

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अति चंचल नित कलह रुचि, पति सों नाहिं मिलाप।

सो अधमा तिय जानिये, पाइय पूरब पाप॥

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लोभ कबहूं कीजिये, या में विपति अपार।

लोभी को विश्वास नहिं, करे कोऊ संसार॥

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सुख में संग मिलि सुख करै, दुख में पाछो होय।

निज स्वारथ की मित्रता, मित्र अधम है सोय॥

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उद्यम कीजै जगत में, मिले भाग्य अनुसार।

मोती मिले कि शंख कर, सागर गोता मार॥

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हिन्दवी उत्सव, 27 जुलाई 2025, सीरी फ़ोर्ट ऑडिटोरियम, नई दिल्ली

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