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Dulandas

1660 - 1778 | لکھنؤ, اتر پردیش

تمام تمام

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दूलन यह मत गुप्त है, प्रगट न करो बखान।
ऐसे राखु छिपाय मन, जस बिधवा औधान1

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राम नाम दुइ अच्छरै, रटै निरंतर कोय।

दूलन दीपक बरि उठै, मन प्रतीति जो होय॥

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